सूर्योदय भास्कर, नई दिल्ली। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने कहा कि केन्द्र सरकार देश के स्वास्थ्य क्षेत्र को पूरी तरह से विकसित करने और आत्मनिर्भर बनाने के लिए काम कर रही है। जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान, जय अनुसंधान के नारे के साथ अनुसंधान और नवाचार मजबूत स्वास्थ्य अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र बनाएंगे। भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में ‘जय अनुसंधान’ एक बहुत महत्वपूर्ण सिद्धांत है।

गुरुवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद – राष्ट्रीय मलेरिया अनुसंधान संस्थान (आईसीएमआर-एनआईएमआर) में पांच नई सुविधाओं का उद्घाटन करते हुए सभा को संबोधित कर रहे थे। इन सुविधाओं में एक परीक्षण अनुसंधान प्रयोगशाला, एक इनोवेशन कॉम्प्लेक्स, एक कॉन्फ्रेंस हॉल कॉम्प्लेक्स और एक 300 सीटों वाला सभागार शामिल है। इस मौके पर केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री एसपी बघेल और डॉ. भारती प्रवीण पवार भी मौजूद रहे।

इस मौके पर “जय अनुसंधान” के महत्व पर प्रकाश डालते हुए डॉ. मनसुख मांडविया ने कहा कि कोरोना के समय में भारत को वैक्सीन प्राप्त करने में कई महीने लग गए होते लेकिन हमने न केवल देश में ही वैक्सीन विकसित की, बल्कि दुनिया के 110 देशों को कम कीमत पर सर्वोत्तम गुणवत्ता वाली वैक्सीन उपलब्ध कराई। इसी तरह हाइड्रोक्सी-यूरिया जैसी दुर्लभ बीमारियों के लिए 14-15 दवाएं हैं, जिनकी कीमत पहले हजारों रुपये हुआ करती थी। आज, ये दवाएं भारत में बनाई जाती हैं और इनकी कीमत पहले की तुलना में बहुत कम होती है।

डॉ. मांडविया ने कहा कि स्वास्थ्य एक बहुत ही गतिशील क्षेत्र है, जहां हर दिन नए अनुसंधान, विकास और नवाचार होते हैं। उन्होंने कहा कि आज हम देश की सेवा में जिन सुविधाओं का उद्घाटन कर रहे हैं, वे दर्शाती हैं कि भारत दुनिया के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने के लिए तैयार है। आईसीएमआर जैसी संस्थाएं आज तेजी से मजबूत हो रही हैं और अपने काम के दम पर पूरी दुनिया में अलग स्थान हासिल कर रही हैं।

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