फर्रुखाबाद। पूरे प्रदेश के नगर निगमों में भारतीय जनता पार्टी का कमल खिला लेकिन जिले की दो नगर पालिका समेत सात नगर पंचायतें सत्तारूढ़ दल के हाथों निकल गयीं इसका ठीकरा किसके सिर फूटेगा यह तो पार्टी के हाथ की बात है। लेकिन यह उस दल के लिए शर्मसार कर देने भर को पर्याप्त है कि जिसकी केन्द्र और राज्य में सरकारें हो, पूरे प्रदेश के नगर निकाय में झण्डा फहरा हो वह यहाँ चारों खाने चित हो गया।

फर्रुखाबाद लोकसभा क्षेत्र से भाजपा के सांसद मुकेश राजपूत दूसरी बार चुने हुए हैं। वरिष्ठ विधायक सुशील शाक्य समेत मेजर सुनील दत्त द्विवेदी, नागेन्द्र सिंह राठौर भी दूसरी बार के विधायक हैं। भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष और विधान परिषद् सदस्य प्रांशु दत्त द्विवेदी भी इसी जनपद के मूल निवासी हैं। यह जिला स्व० ब्रह्मदत्त द्विवेदी और स्व० दयाराम शाक्य जैसे दिग्गज और ईमानदार नेताओं की कर्मभूमि रहा है।

आज स्व0 द्विवेदी के पुत्र और स्व0 शाक्य के पुत्र यहाँ उनकी राजनैतिक विरासत सँभाल रहे हैं। यह वही बड़े नाम हैं जिनका ढंका पूरे देश में बज चुका है। यह जब सदन में बोलने खड़े होते थे तो विपक्ष हंगामा काटने को मजबूर होता था। बीते पंचायत चुनाव और वर्तमान में हुए नगर निकाय चुनाव में भाजपा की जहाँ खुलकर किरकिरी हुई वहीं टिकटे बेंचने तक के आरोप लगे। वह बात अलग है कि कोई खुलकर नहीं बोला, न ही कोई संगठनात्मक कार्यवाही हुई।

केन्द्र और राज्य की तमाम लोकलुभावन योजनाओं के बलवूते भारतीय जनता पार्टी ने अपने वोट बैंक में तो इतना इजाफा किया कि बहुजन समाजवादी पार्टी का पराम्परागत वोट और मुस्लिम मतदाता को भी अपनी ओर आकर्षित कर लिया। उसके बाद पार्टी मजबूत चेहरों को चुनाव मैदान में क्यों नहीं उतार सकी। यहाँ क्यों समाजवादी पार्टी का आज भी बोला बाला है, यह सवाल हर जुबान पर है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जीरो टालरेंस नीति पूरे उत्तर प्रदेश पर प्रभावी है लेकिन जनपद में उसके मायने अलग हैं। यहाँ गुण्डा और माफिया अगर सपा और बसपा से ताल्लुक रखता है तो उसे पवित्र करने के लिए उपमुख्यमंत्री स्तर के मंच पर भाजपा में शामिल किया जाता है या फिर अगर कोई बड़ा खिलाड़ी है तो रात के अंधेरे में उससे समझौता होता है। जीता जागता नमूना कोई और नहीं अकेले सुबोध यादव हैं। जिन पर सांसद की पैरवी से मुख्यमंत्री कार्यालय ने कार्यवाही के निर्देश दिये और वह शिकायत धूल फांक गयी। सूत्र तक यहाँ तक बताते हैं कि दुरभि संधि के बलवूते भाजपा के जिम्मेदार सुबोध यादव जैसे ताकतवर सपा नेताओं के आगे घुटने टेक उनसे फायदा लेने लगे। फिर वो बात अलग है कि भारतीय जनता पार्टी का हस्र कुछ भी हो । यहाँ सिर्फ यहाँ के जिम्मेदारों का नियम और कायदा चलता है, यहाँ मिल बाँट कर सबका साथ और सबका विकास होता है। जिसका जीता जागत उदाहरण जिले की दो नगर पालिकाओं और पाँच नगर पंचायतों का हाथ से जाना है।। जिसका जीवंत उदाहरण भाजपा जिलाध्यक्ष और कमेटी की पुलिस द्वारा पिटाई होना है, जिसका जीवंत उदाहरण कार्यकर्ताओं का खुलेआम उत्पीड़न है।

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